Readers

Start free, or buy shards for anything

Free titles need no account. For the rest: link your credits account once and card top-ups are instant, or pay with bitcoin or Lightning straight away.

Authors

Keep 70–75%, cash out from $1

Instant zero-fee Lightning, or Zelle and Cash App from $10. List one free title and your rate goes to 75%.

NewComics are here. Upload a PDF or CBZ, keep 70–75%.Publishing comics
Free Sample Preview

Step Mashi

1,196 words·6 min read

एपिसोड १: गर्मियों की वो पहली शाम और अनजाना खिंचाव

गर्मियों के दिन थे, और सूरज की तपिश अभी पूरी तरह ढली भी नहीं थी कि आसमान में अचानक बादलों ने डेरा डाल लिया था। हवा में एक अजीब सी भारीपन और नमी थी, जो इस बात का संकेत दे रही थी कि कुछ ही देर में बारिश होने वाली है।

राहुल अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ा था। उसका हाथ खिड़की के लोहे के ग्रिल पर था और वह बाहर सड़क की तरफ देख रहा था। उसकी उम्र अभी-अभी अठारह साल पूरी हुई थी। स्कूल की पढ़ाई खत्म हो चुकी थी, कॉलेज में दाखिले की प्रक्रिया चल रही थी, और उसके भीतर एक अजीब सा खालीपन और बेचैनी थी। वह न तो पूरी तरह बच्चा था और न ही कोई समझदार वयस्क; वह उम्र के उस मुहाने पर खड़ा था जहाँ शरीर और मन दोनों में एक नया तूफान उठ रहा होता है।

तभी नीचे मुख्य दरवाजे की घंटी बजी—एक तेज, गूंजती हुई आवाज जिसने राहुल के ख्यालों को तोड़ दिया।

नीचे के हॉल से रीना की खुशियों से भरी आवाज गूँजी। रीना राहुल की स्टेपमॉम (सौतेली माँ) थीं। पिछले कुछ सालों से वह इस घर में रह रही थीं, और उनके साथ राहुल का रिश्ता काफी सामान्य और शिष्टाचार वाला था। लेकिन उस दिन रीना के स्वर में एक अलग ही उत्साह था। वह चीखते हुए बोलीं, “प्रिया! आ गई मेरी जान! दरवाज़ा खोलो कोई!”

राहुल ने गहरी साँस ली और सीढ़ियों की तरफ कदम बढ़ाए। वह धीरे-धीरे नीचे उतर रहा था, और जैसे-जैसे वह ज़मीन पर पहुँच रहा था, उसके कान में एक नए और ताजे लहजे की हँसी सुनाई दे रही थी।

दरवाजे पर खड़ी वो शख्सियत

जब राहुल ने हॉल पार करके मुख्य दरवाजा खोला, तो उसके सामने जो दृश्य था, उसने अगले कुछ पलों के लिए उसकी साँसें रोक दीं।

दरवाजे की चौखट पर एक लड़की खड़ी थी। उसकी उम्र महज उन्नीस साल थी—राहुल से सिर्फ एक साल बड़ी। उसने एक सादा लेकिन आकर्षक सफेद कॉटन का टॉप और नीले रंग की फिटेड जीन्स पहन रखी थी, जो उसके युवा और कस कसे हुए शरीर को बखूबी ढाल रही थी। उसके लंबे, घने काले बाल सफर की थकान और उमस के कारण हल्के से उसके पसीने से भीगे हुए कंधों पर बिखरे हुए थे। उसके चेहरे पर हल्की सी पसीने की चमक थी, जो सूरज की आखिरी रोशनी में किसी ओस की बूँद की तरह चमक रही थी।

लेकिन इन सबसे ज्यादा राहुल का ध्यान उसकी आँखों ने खींचा। उन आँखों में कोई बचपना नहीं था, बल्कि एक अजीब सी परिपक्वता, गहराई और आत्मविश्वास था जो राहुल को एक ही पल में अपनी ओर खींच रहा था।

वह प्रिया थी—रीना की छोटी बहन, जो कुछ दिनों के लिए शहर में रहने आई थी।

प्रिया ने राहुल को देखते ही अपने चेहरे पर एक बहुत प्यारी सी मुस्कान सजाई। उसकी मुस्कान में एक हल्की सी शरम थी, लेकिन आँखों की चमक बिल्कुल बरकरार थी। उसने बड़े सहज अंदाज में कहा, “हाय! तुम राहुल हो ना?”

राहुल एक पल के लिए जैसे सुन्न हो गया। उसने अपनी जीभ से अपने सूखे होंठों को भिगोया और सिर हिलाते हुए फँसी हुई आवाज में कहा, “हाँ... नमस्ते।” उसकी आवाज सामान्य से थोड़ी भारी और दबी हुई निकली।

उसी समय रीना वहाँ आ गईं। उन्होंने उत्साह में आकर प्रिया और राहुल दोनों को एक साथ अपनी बाहों में समेट लिया। “अरे, तुम दोनों खड़े क्यों हो अंदर आओ! प्रिया कुछ दिनों के लिए यहीं रुक रही है। तुम दोनों अच्छे से मिलो-जुलो। राहुल, यह तुम्हारी मौसी जैसी नहीं है, इसे अपनी बहन समझो... बल्कि दोस्त समझो।”

प्रिया रीना की बात सुनकर खिलखिलाकर हँस पड़ी। उसकी हँसी में एक अजीब सा संगीत था। उसने राहुल की तरफ देखते हुए कहा, “बहन? दीदी, मैं तो सिर्फ एक साल बड़ी हूँ इस से। राहुल, मौसी या दीदी मत बोलना प्लीज। बस प्रिया कहो।”

राहुल ने बस एक हल्का सा सिर हिलाकर मुस्कराने की कोशिश की। उसके भीतर कुछ ऐसा चल रहा था जिसे वह खुद शब्दों में बयां नहीं कर पा रहा था।

चाय की प्याली और नजरों का फिसलना

थोड़ी देर बाद, शाम की चाय का वक्त हुआ। लिविंग रूम में सोफे पर सब लोग बैठे थे। रीना किचन से चाय और स्नैक्स लेकर आईं। प्रिया लगातार बातें कर रही थी—अपने कॉलेज के किस्से, अपने दोस्तों की शरारतें, शहर की तेज भागती जिंदगी और वहाँ के अनुभवों के बारे में।

राहुल एक कोने में चुपचाप बैठा था। वह चाय का कप हाथ में पकड़े हुए था, लेकिन उसका ध्यान चाय में कम और प्रिया के हर एक मूवमेंट पर ज्यादा था।

प्रिया जब भी बोलती, उसके होंठ एक खास अंदाज में हिलते थे। राहुल की नजरें बार-बार अनजाने में प्रिया के होंठों पर, उसके गले के पास लटकती हुई हल्की सी चांदी की चैन पर, और जब वह खुलकर हँसती तो उसके साँसों के साथ हिलते हुए उसके संतरे (स्तन) के उभार पर चली जाती थीं।

राहुल के भीतर एक नैतिक द्वंद्व शुरू हो गया था। वह मन ही मन खुद को कोस रहा था, “ये मेरी स्टेपमॉम की बहन है... वह मेरी मेहमान है... मैं इसके बारे में ऐसा क्यों सोच रहा हूँ? यह गलत है।”

लेकिन दिमाग के लाख समझाने के बावजूद उसकी आँखें बार-बार प्रिया के बदन की उन रेखाओं की तरफ खिंची चली जा रही थीं जो उसके सफेद टॉप के नीचे साफ झलक रही थीं। प्रिया शायद राहुल की इस खामोशी और घूरने की आदत को भाप चुकी थी, क्योंकि कई बार जब राहुल की नजरें अचानक प्रिया से मिलतीं, तो प्रिया अपनी पलकें झुका लेती और उसके चेहरे पर एक गहरी, अर्थपूर्ण मुस्कان तैर जाती थी।

बालकनी की ठंडी हवा और गहरी बातें

रात का खाना खाने के बाद पूरा घर शांत हो चुका था। रीना और राहुल के पिता अपने कमरे में जा चुके थे। घर की बड़ी सी बालकनी में हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी, जो दिनभर की उमस को कम कर रही थी।

राहुल अपने हाथ में एक नॉवेल लेकर बालकनी की एक छोटी सी कुर्सी पर बैठा था और पन्ने पलट रहा था। तभी पैर की आहट हुई। प्रिया वहाँ आई। उसने अपने बाल खुले छोड़े हुए थे और एक ढीला-ढाला कुर्ता पहन रखा था। वह सीधी आकर राहुल के ठीक बगल वाली कुर्सी पर बैठ गई।

“क्या पढ़ रहे हो इतनी रात को?” प्रिया ने अपनी मंद आवाज में पूछा।

राहुल ने अपनी किताब थोड़ी झुकाकर कवर दिखाया। “एक रोमांटिक थ्रिलर है।”

प्रिया ने राहुल के हाथ से किताब ले ली और उसके पन्ने पलटने लगी। उसकी उँगलियाँ राहुल की उँगलियों से हल्की सी छू गईं। उस मामूली से स्पर्श से राहुल के पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। प्रिया ने किताब वापस देते हुए कहा, “मुझे भी रोमांस और मिस्ट्री पसंद है। लेकिन रियल लाइफ में रोमांस कितना मुश्किल और उलझा हुआ होता है ना? किताबों जैसा सीधा नहीं होता।”

उसने एक लंबी आह भरी। राहुल ने अपनी किताब बंद कर दी और बालकनी की रेलिंग पर हाथ रखकर बाहर अंधेरे में देखने लगा।

“क्यों? तुम्हें क्या लगता है?” राहुल ने पूछा।

प्रिया ने अपनी कुर्सी को थोड़ा और राहुल के करीब सरकाया। अब दोनों के बीच की दूरी बहुत कम रह गई थी। प्रिया ने अपनी जिंदगी की कुछ बातें बतानी ...

You've read 10% of this book.
Purchase to continue reading the full story.
◇ 300 — Purchase to Continue

Get notified about free books and sales.